भावपूर्वक श्रद्धांजलि : पहलगाम के शहीदों को नमन

22 अप्रैल 2025 का दिन भारतीय इतिहास में एक और दर्दनाक स्मृति के रूप में दर्ज हो गया। कश्मीर की सुरम्य घाटी में स्थित पहलगाम, जो अपने प्राकृतिक सौंदर्य और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है, उस दिन आतंक के साए में कांप उठा। निर्दोष नागरिकों पर किए गए इस कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले ने न केवल कई मासूम जिंदगियों को छीन लिया, बल्कि पूरे देश को शोक की लहर में डुबो दिया। इस हमले में कई निर्दोष नागरिकों की जान चली गई, जिनमें से कुछ पर्यटक थे, कुछ स्थानीय व्यापारी और कुछ ऐसे थे जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी जीने के लिए अपने काम में लगे हुए थे। यह हमला सिर्फ उन व्यक्तियों पर नहीं था, बल्कि मानवता, शांति और एकता पर भी एक गहरा आघात था। शहीद हुए नागरिकों की कुर्बानी को शब्दों में समेटना कठिन है। उन्होंने न जाने-अनजाने में उस देशभक्ति की मिसाल पेश की है, जो हर भारतीय के दिल में बसी होती है। आतंकियों का मकसद भय फैलाना था, लेकिन हमारे शहीदों की शहादत ने एक बार फिर ये सिद्ध कर दिया कि भारत एकजुट है, अडिग है और किसी भी आतंकी मानसिकता से डरने वाला नहीं।…

भारत-पाकिस्तान जीरो लाइन: एक भयानक सच्चाई.

भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध हमेशा से ही नाजुक रहे हैं। 1947 में विभाजन के समय से शुरू हुआ तनाव आज भी अलग-अलग रूपों में दिखाई देता है। इन्हीं मुद्दों में से एक सबसे संवेदनशील विषय है — "जीरो लाइन", जिसे औपचारिक रूप से "लाइन ऑफ कंट्रोल" (LoC) कहा जाता है। जीरो लाइन क्या है? "जीरो लाइन" एक अनौपचारिक शब्द है, जिसका उपयोग विशेषकर कश्मीर क्षेत्र में भारत और पाकिस्तान के सैनिक करते हैं। यह वह अदृश्य रेखा है, जिसके एक ओर भारतीय सेना तैनात है और दूसरी ओर पाकिस्तानी सेना। इस सीमा रेखा पर हमेशा तनावपूर्ण वातावरण बना रहता है और समय-समय पर यहां गोलीबारी या झड़पें होती रहती हैं। 1947-48 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद, जब कश्मीर विवाद ने गंभीर रूप ले लिया, तब दोनों देशों ने जिस-जिस क्षेत्र पर कब्जा किया था,…

भारत-पाकिस्तान सिंधु जल समझौता: एक महत्वपूर्ण विश्लेषण……….!!!!!!!

परिचय: भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में कई बार तनाव देखने को मिला है, लेकिन कुछ समझौते ऐसे हैं जिन्होंने दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग का एक सेतु बनाया है। ऐसा ही एक महत्वपूर्ण समझौता है सिंधु जल समझौता (Indus Waters Treaty), जो आज भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक सफल जल बंटवारे का उदाहरण माना जाता है। सिंधु जल समझौते का इतिहास: 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद सिंधु नदी प्रणाली के पानी के उपयोग को लेकर दोनों देशों में विवाद उत्पन्न हुआ। इस समस्या का समाधान खोजने के लिए विश्व बैंक की मध्यस्थता से 19 सितंबर 1960 को भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने कराची में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते की मुख्य बातें: सिंधु नदी प्रणाली में कुल छह नदियाँ शामिल हैं: सिंधु, झेलम,…