हम नींद में क्यों बोलते या हँसते हैं ? जानिए इस रहस्यमयी व्यवहार का वैज्ञानिक कारण..

परिचय:

क्या आपने कभी किसी को नींद में बातें करते या अचानक हँसते हुए देखा है? या शायद आप खुद कभी नींद में बोल पड़े हों! यह एक रोचक और कभी-कभी चौंकाने वाली स्थिति होती है। लेकिन आखिर हम नींद में क्यों ऐसा करते हैं? चलिए जानते हैं इसके पीछे छिपा वैज्ञानिक रहस्य।

नींद में बोलना क्या होता है?

इस स्थिति को मेडिकल भाषा में “स्लीप टॉकिंग” या Somniloquy कहा जाता है। यह एक प्रकार का नींद विकार (Sleep Disorder) है जिसमें व्यक्ति बिना जागे ही शब्द, वाक्य या कभी-कभी पूरी बातचीत करता है। यह आमतौर पर गहरी नींद (Non-REM sleep) या REM sleep के दौरान होता है।

नींद में हँसने का क्या कारण होता है?

नींद में हँसना, जिसे Hypnogely कहा जाता है, आमतौर पर REM sleep के दौरान होता है जब हम सपने देख रहे होते हैं। यह हँसी किसी मजेदार सपने का नतीजा हो सकती है, या फिर मस्तिष्क की असामान्य तंत्रिका क्रियाओं का परिणाम हो सकती है।

नींद में बोलने और हँसने के संभावित कारण:

1. तनाव या मानसिक दबाव: दिन भर के अनुभव और दबाव मस्तिष्क में चलते रहते हैं, जो नींद में आवाज़ों के रूप में बाहर आ सकते हैं।

2. सपने: मजेदार या विचित्र सपने नींद में हँसी या बातचीत का कारण बन सकते हैं।

3. नींद की गड़बड़ी: जैसे Night Terrors, Sleepwalking आदि के साथ यह लक्षण अक्सर जुड़े होते हैं।

4. जीन और अनुवांशिकता: यह प्रवृत्ति परिवार में भी देखी जा सकती है।

5. थकावट या अनियमित नींद: अत्यधिक थकान भी ऐसे व्यवहार को बढ़ावा दे सकती है।

क्या यह खतरनाक है?

सामान्य रूप से नींद में बोलना या हँसना हानिकारक नहीं होता। लेकिन अगर यह बहुत बार होता है, नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करता है, या इसके साथ नींद में डरना, चलना या चीखना जुड़ा हो – तो डॉक्टर से संपर्क करना उचित होगा।

इसे कैसे नियंत्रित करें?

नियमित नींद लें (7-8 घंटे)।

सोने का समय तय करें।

तनाव कम करने के लिए ध्यान या योग करें।

कैफीन और शराब से बचें।

सोने से पहले मोबाइल/टीवी कम देखें।

निष्कर्ष:

नींद में हँसना या बोलना एक सामान्य मानवीय व्यवहार है जो नींद के दौरान मस्तिष्क की गतिविधियों का परिणाम है। यह आमतौर पर चिंता का विषय नहीं होता, लेकिन लगातार और तीव्रता से होने पर विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।