
भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध हमेशा से ही नाजुक रहे हैं। 1947 में विभाजन के समय से शुरू हुआ तनाव आज भी अलग-अलग रूपों में दिखाई देता है। इन्हीं मुद्दों में से एक सबसे संवेदनशील विषय है — “जीरो लाइन”, जिसे औपचारिक रूप से “लाइन ऑफ कंट्रोल” (LoC) कहा जाता है।
जीरो लाइन क्या है?
“जीरो लाइन” एक अनौपचारिक शब्द है, जिसका उपयोग विशेषकर कश्मीर क्षेत्र में भारत और पाकिस्तान के सैनिक करते हैं। यह वह अदृश्य रेखा है, जिसके एक ओर भारतीय सेना तैनात है और दूसरी ओर पाकिस्तानी सेना। इस सीमा रेखा पर हमेशा तनावपूर्ण वातावरण बना रहता है और समय-समय पर यहां गोलीबारी या झड़पें होती रहती हैं।
1947-48 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद, जब कश्मीर विवाद ने गंभीर रूप ले लिया, तब दोनों देशों ने जिस-जिस क्षेत्र पर कब्जा किया था, वहां एक अस्थायी नियंत्रण रेखा स्थापित की गई। 1972 के शिमला समझौते के बाद इस नियंत्रण रेखा को आधिकारिक रूप से “लाइन ऑफ कंट्रोल” का दर्जा मिला। हालांकि, सैनिक और स्थानीय लोग इसे प्रायः “जीरो लाइन” के नाम से ही जानते हैं।
जीरो लाइन का महत्व
जीरो लाइन केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं है, बल्कि यह एक राजनीतिक और सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। इस रेखा के दोनों ओर सेनाएं हमेशा तैनात रहती हैं और कभी भी परिस्थितियां गंभीर हो सकती हैं।
यहां तैनात सैनिक कठिन जलवायु, ऊंचे पहाड़ी इलाकों, निरंतर खतरे और सतर्कता के बीच अपना कर्तव्य निभाते हैं।
सीमा के पास बसे नागरिकों का जीवन भी बेहद कठिन है। संघर्ष बढ़ने पर उन्हें अपने घर छोड़कर पलायन करना पड़ता है या बंकरों में शरण लेनी पड़ती है।
जीरो लाइन की विशेषताएँ
ऊंची पर्वतमालाओं में फैली हुई: खासकर कारगिल, पुंछ, राजौरी और बडगाम जैसे क्षेत्रों में जीरो लाइन का अस्तित्व अधिक स्पष्ट है।
लगातार गोलीबारी का खतरा: युद्धविराम समझौते के बावजूद, समय-समय पर इसका उल्लंघन होता रहता है।
मानवीय संकट: सीमावर्ती गांवों के लोग हमेशा असुरक्षा के साये में जीते हैं।
सीमा चौकियां और बंकर: दोनों देशों ने अपने सैनिकों की सुरक्षा के लिए बंकर और चौकियां स्थापित की हैं।
निष्कर्ष
भारत-पाकिस्तान जीरो लाइन सिर्फ एक सीमा रेखा नहीं, बल्कि दोनों देशों के संघर्ष का एक जीता-जागता इतिहास है। यहां तैनात हर सैनिक और सीमा पर रहने वाला हर नागरिक अपने स्तर पर देश के लिए बलिदान कर रहा है।
भविष्य में इस रेखा के दोनों ओर शांति स्थापित हो — यह हर भारतीय का सपना है।